Samagam Patrika- सुमिरन बैरागी



बालकवि होना तो एक बार आसान हो सकता है लेकिन सत्ता के साथ होते हुए बैरागी होना असम्भव ना भी हो तो मुश्किल ज़रूर है लेकिन बैरागी बन कर सत्ता के साथ रहकर लोक धर्म निभाने वाले बालकवि बैरागी बिरले लोगों मैं एक है। भौतिक रूप से वे अब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन साहित्य, राजनीति और पत्रकारिता में जो प्रतिमान उन्होंने गढ़े, वह मार्गदर्शक बनकर हमारे साथ हैं. "समागम" के इस अंक में सुमिरन बैरागी पर केंद्रित है.